प्रयागराज- गंगा किनारे शव दफनाने की वर्षों पुरानी परंपरा पर हुआ बेवजह बवाल

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नई दिल्लीः कोरोना महामारी की दूसरी लहर में हुई मौतों को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है. इसमें तीर्थनगरी प्रयागराज को बेवजह लपेटा गया है। प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर घाट पर 2018 में दफनाए गए शवों की अधिकांश तस्वीरों को इंटरनेट मीडिया पर वायरल करके उसको कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत से जोड़ा जा रहा है।

इंटरनेट मीडिया में बवाल

बता दें की तीर्थराज प्रयाग में पीढिय़ों से कई हिंदू परिवारों में शवों को गंगा नदी के तीरे रेती में दफनाने की परंपरा है। दफनाए गए शवों की ताजा तस्वीरों को कोरोना में हुई मौतों से जोड़कर इंटरनेट मीडिया में हो-हल्ला मचाया जा रहा है। 2018 में कोरोना संक्रमण नहीं था इसके बाद भी तीन वर्ष पहले की ऐसी ही तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल है। प्रयागराज में कई हिंदू परिवारों में गंगा किनारे शव दफन करने की पुरानी परंपरा है।

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शव दफनाने का सिलसिला

प्रयागराज के फाफामऊ के साथ ही श्रृंगवेरपुर में ऐसे हजारों शव दफन हुए होंगे। यहां पर सफेद दाग, कुष्ठ रोग, सर्पदंश सहित अकाल मौतों से जुड़े शव लाए जाते हैं। 85 वर्ष के पंडा राममूरत मिश्रा कहते हैं कि मैं तो श्रृंगवेरपुर में अपने बचपन से ही शवों को जलाने के साथ ही दफनाने का सिलसिला देख रहा हूं। सफेद दाग और सांप कटा तो दफनावै जाते हैं। छह-सात जिलन से संपन्न से लेकर गरीब परिवार तक भी शव लेकर आते हैं। उनके यहां दफ़नाने की परंपरा है।

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परंपरा के तहत दफनाए शव

श्रृंगवेरपुर से महज तीन किमी दूरी पर है गांव मेंडारा। यहां दस अप्रैल से लेकर दस मई तक के बीच करीब 50 लोगों की मौत हुई। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान महेश्वर कुमार सोनू का कहना है कि इनमें से करीब 35 शव गंगा की रेती पर परंपरा के तहत दफनाए गए। मरने वालों में कोई कैंसर से पीडि़त था तो किसी की अस्थमा और हार्ट अटैक से मौत हुई।

 

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नई दिल्लीः कोरोना महामारी की दूसरी लहर में हुई मौतों को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है. इसमें तीर्थनगरी प्रयागराज को बेवजह लपेटा गया है। प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर घाट पर 2018 में दफनाए गए शवों की अधिकांश तस्वीरों को इंटरनेट मीडिया पर वायरल करके उसको कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत से जोड़ा जा रहा है।

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बता दें की तीर्थराज प्रयाग में पीढिय़ों से कई हिंदू परिवारों में शवों को गंगा नदी के तीरे रेती में दफनाने की परंपरा है। दफनाए गए शवों की ताजा तस्वीरों को कोरोना में हुई मौतों से जोड़कर इंटरनेट मीडिया में हो-हल्ला मचाया जा रहा है। 2018 में कोरोना संक्रमण नहीं था इसके बाद भी तीन वर्ष पहले की ऐसी ही तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल है। प्रयागराज में कई हिंदू परिवारों में गंगा किनारे शव दफन करने की पुरानी परंपरा है।

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प्रयागराज के फाफामऊ के साथ ही श्रृंगवेरपुर में ऐसे हजारों शव दफन हुए होंगे। यहां पर सफेद दाग, कुष्ठ रोग, सर्पदंश सहित अकाल मौतों से जुड़े शव लाए जाते हैं। 85 वर्ष के पंडा राममूरत मिश्रा कहते हैं कि मैं तो श्रृंगवेरपुर में अपने बचपन से ही शवों को जलाने के साथ ही दफनाने का सिलसिला देख रहा हूं। सफेद दाग और सांप कटा तो दफनावै जाते हैं। छह-सात जिलन से संपन्न से लेकर गरीब परिवार तक भी शव लेकर आते हैं। उनके यहां दफ़नाने की परंपरा है।

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श्रृंगवेरपुर से महज तीन किमी दूरी पर है गांव मेंडारा। यहां दस अप्रैल से लेकर दस मई तक के बीच करीब 50 लोगों की मौत हुई। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान महेश्वर कुमार सोनू का कहना है कि इनमें से करीब 35 शव गंगा की रेती पर परंपरा के तहत दफनाए गए। मरने वालों में कोई कैंसर से पीडि़त था तो किसी की अस्थमा और हार्ट अटैक से मौत हुई।

 

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