आखिर क्यों ख़ास है हरिद्वार का कुंभ और होने वाला शाही स्नान

नई दिल्ली: भारत में हर 12वें वर्ष हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी इसका आयोजन किया जाता है. हालांकि, कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार हरिद्वार में यह 12 साल की बजाय 11वें साल में आयोजित हुआ है। हरिद्वार में कुंभ मेला आज से शुरू हो गया है. 30 अप्रैल तक चलने वाले कुंभ मेले में जाने के लिए श्रद्धालुओं को 72 घंटे पहले की कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी. कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक कार्यक्रम है. हालांकि, कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार हरिद्वार में यह 12 साल की बजाय 11वें साल में आयोजित हुआ है।

क्यों ख़ास है इस बार का हरिद्वार कुंभ

हरिद्वार में कुंभ मेला आज से शुरू हो गया है. 30 अप्रैल तक चलने वाले कुंभ मेले में जाने के लिए श्रद्धालुओं को 72 घंटे पहले की कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी. कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक कार्यक्रम है। हालांकि, कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार हरिद्वार में यह 12 साल की बजाय 11वें साल में आयोजित हुआ है। कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित 12 राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं पर विशेष नजर रहेगी। जिले के सभी बॉर्डर और मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग श्रद्धालुओं की रैंडम सैंपलिंग करेगा। धर्मशालाओं और होटलों में बिना कोविड निगेटिव रिपोर्ट के श्रद्धालु नहीं ठहर पाएंगे।

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इस बार होंगे चार शाही स्नान

इस वर्ष भी कुंभ मेले के दौरान पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्त इकट्ठे हो सकते हैं. हालांकि महामारी से निपटने के लिए सरकार ने सख्त गाइडलाइ भी जारी की हैं. कुंभ में इस बार 4 शाही स्नान होंगे और इसमें 13 अखाड़े भाग लेंगे. इन अखाड़ों से झांकी निकाली जाएंगी. इस झांकी में सबसे आगे नागा बाबा होंगे और महंत, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर नागा बाबाओं का अनुसरण करेंगे.

शाही स्नान की तिथियां

सोमवती अमावस्या (शाही स्नान) – अप्रैल 12, 2021
बैसाखी (शाही स्नान) – अप्रैल 14, 2021
राम नवमी (स्नान) – अप्रैल 21, 2021
चैत्र पूर्णिमा (शाही स्नान) – अप्रैल 27, 2021

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