जानिए हजारों करोड़ों के रोशनी घोटाले के बारे में, मेहबूबा मुफ़्ती सहित कई नेता शामिल

J&k Roshni Act
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नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े जमीन घोटाले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. 25 हजार करोड़ के इस जमीन घोटाले में कई पार्टी के नेताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है. जम्मू-कश्मीर में सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जा करने वाले नेताओं और नौकरशाहों की लिस्ट सामने आयी है.

J&k Roshni Act
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क्या है रोशनी एक्ट-

पिछले कई सालों में, विभिन्न माध्यमों से सरकार और वन भूमि पर कब्जे करने का ये मामला जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है. अब सवाल उठता है कि ये रोशनी एक्ट है क्या, तो आपको बता दें कि यह एक्ट प्रभावशाली लोगों द्वारा सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण को नियमित करने के लिए बनाया गया था.

2001 में, ‘जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (व्यवसायियों का स्वामित्व का मामला) अधिनियम 2001’ लोगों को राज्य भूमि के स्वामित्व के निहितार्थ प्रदान करने के लिए पारित किया गया था, जो ऐसी भूमि पर काबिज थे. इसी एक्ट की ओट में पूरे जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों एकड़ मूल्यवान वन और राज्य की भूमि पर अवैध रूप से प्रभावशाली राजनेताओं, व्यापारियों, नौकरशाहों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण और कब्जा कर लिया गया.

सीबीआई द्वारा की जा रही है जांच- 

25,000 करोड़ रुपये के इस जमीन घोटाला की जांच अब सीबीआई द्वारा की जा रही है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (व्यवसायियों का स्वामित्व का मामला) 2001 अधिनियम- आमतौर पर रोशनी अधिनियम के रूप में जाना जाता है. इसे 2000 के बजट भाषण में तत्कालीन नेशनल कांफ्रेंस सरकार के वित्त मंत्री रहीम राथर द्वारा पेश किया गया था.
रोशनी अधिनियम के तहत प्रस्तावित किया गया था कि वर्ष 1990 तक प्रचलित बाजार दर के बराबर लागत के भुगतान पर, 1990 तक अनाधिकृत रूप से राज्य की भूमि पर कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को मालिकाना हक दिया जाए. क्योंकि इन जमीनों को वापस ले पाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा था.

1999 के पहले जो सरकारी जमीन थी उसे गरीब तबके के लोगों को विधिपूर्वक जमीन उपलब्ध कराने के लिए रोशनी एक्ट बनाया गया था. इसका दूसरा उपयोग पॉवर प्रोजेक्ट के लिए पैसा इकट्ठा करना था ताकि उसे जम्मू-कश्मीर के पॉवर प्रोजेक्ट में लगाया जा सके. 2001 में इसे बनाया गया था. लेकिन इसमें समय-समय पर संशोधन किया जाता रहा. समय-समय पर राज्य में सरकारें बदलती रहीं और लगातार राजनेताओं को फायदा उठाने का मौका दिया जाता रहा. इस घोटाले में कई बिजनेसमैन और अफसरशाहों के नाम भी सामने आए हैं. अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन लोगों से जमीन वापस ली जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि राज्य में होने वाले डीडीसी चुनावों के दौरान यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है.

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