चीन ने माना भारतीय सैनिकों ने उसके सैनिकों को उतारा था मौत के घाट

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नई दिल्ली। चीन ने पहली बार माना है कि बीते पिछले वर्ष जून में लद्दाख की गलवन घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में उनके चार सैनिक मारे गए थे। चीन के एक अखबार के एक ट्वीट के हवाले से एएनआई ने इसकी जानकारी दी है। अखबार में कहा गया है कि चीन ने इस पहली बार न सिर्फ ये बात मानी है बल्कि इन जवानों को मरणोपरांत पदक देने का भी एलान किया है। बता दे इस झड़प में चीन की आर्मी का एक कर्नल भी घायल हो गया था।

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चीन को दिया करारा जवाब

बता दें कि गलवन वैली में ये झड़प उस वक्‍त हुई थी जब भारतीय सैनिक अपनी सीमा से चीनी सैनिकों को वापस जाने के लिए कहने गए थे। इसी बीच चीनी सैनिकों ने कंटीले तार लगी हुई लोहे की रॉड से भारतीय सैनिकों पर हमला बोल दिया था। इस खूनी लड़ाई में भारतीय सैनिकों ने चीन को करारा जवाब दिया था। हालांकि इसमें भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 जवान शहीद हो गए थे।

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सीमा पर जबरदस्‍त तनाव

बता दे गलवन की इस घटना के बाद से ही लद्दाख की सीमा पर जबरदस्‍त तनाव दिखाई दिया था, इस झड़प के बाद एक अमेरिकी रिपोर्ट में बताया गया था कि इस खूनी झड़प में चीन के करीब 30-40 जवान मारे गए हैं। हालांकि चीन ने कभी इनका कोई जिक्र नहीं किया था। लकिन अब ऐसा पहली बार हुआ है कि इनके बारे में चीन ने सच्‍चाई कबूल की है।

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सीमा पर चौकसी

गलवन की घटना के बाद दोनों ही तरफ से न सिर्फ सीमा पर सेना का जमावड़ा बढ़ाया गया बल्कि किसी भी विपरीत परिस्थितियों का जवाब देने के लिए भारत ने वहां पर तोपखाने की भी तैनाती कर दी थी। इसके अलावा भारतीय वायुसेना को हर वक्‍त अलर्ट पर रखा गया था। साथ ही सीमा पर चौकसी को बढ़ा दिया गया था। कुछ समय पहले केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कहा था कि भारत अपने सैनिकों को एकतरफा सीमा से वापस नहीं बुलाएगा।

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