काेराेना खत्म हाेने के बाद 20 कराेड़ लोग हो जाएंगे गरीब: संयुक्त राष्ट्र संघ

How will the world be after Corona
How will the world be after Corona

नई दिल्ली: अभी कोरोना खत्म भी नहीं हुआ है की लोगो ने अब यह सोचना शुरू कर दिया है की कोरोना ख़त्म होने के बाद कैसी होगी दुनिया क्या पहले की तरह सबकी आम जिंदगी होगी या क्या अलग होगा कोरोना के बाद सबके जीवन में. दुनिया में राष्ट्रीय स्तर पर अलगाववाद बढ़ेगा या दुनिया एकजुट हो जाएगी? देश पास आएंगे या दूर छिटक जाएंगे? सरंक्षणवाद पर जोर होगा या दुनिया खुल जाएगी? कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि नागरिकों को सशक्तिकरण बढ़ेगा या आर्टिफिशियल सर्विंलांस के नाम पर सरकारें नागरिकों के बेडरुम तक पहुंच जाएंगी? ऐसे कई तरह के सवाल सभी के मन में होंगे।

भारत के दो करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे-

संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह दावा किया है कि कोरोना के कारण बीस करोड़ से ज्यादा लोग बहुत ज्यादा गरीब हो जाएंगे. इसमें भारत के दो करोड़ तक लोग गरीबी रेखा की सीमा से नीचे आ सकते हैं. पिछले पन्द्रह सालों में भारत ने गरीब उत्थान की दिशा में बहुत काम किया है. संयुक्त राष्ट्र संघ का दावा है कि सात करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी की सीमा रेखा से उबारा गया है लेकिन कोरोना काल में भारतीय अर्थव्यवस्था माइनस में चली गयी (माइनस 24 फीसद पहली तिमाही में और माइनस 7.5 फीसद दूसरी तिमाही में). यहाँ तक कि पूरे साल की विकास दर भी माइनस में रह सकती है.

कोरोना के बाद कैसी होगी दुनिया
कोरोना के बाद कैसी होगी दुनिया

कोरोना ने करोडों लोगो की नौकरियां और जिंदगियां छीनी हैं और कईयों को नौकरियां दी भी हैं। जहाँ कोरोना से विकासशील देशों की हालत बहुत ख़राब है वहीं अनुमान लगाया जा रहा है की कोरोना के बाद इन देशों की हालत और भी खस्ता हो जाएगी. वहीं जिन देशो में तानाशाह है वहां के जनता की हालत तो और भी ख़राब हो सकती है क्योंकि तानाशाह कोरोना का फायदा उठा रहे हैं. जहां-जहां तानाशाह नहीं हैं वहां भी सत्तापक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या करने में लगे हैं.

काेराेना की आड़ में सरकारें उठा रही जनता का फायदा

कहा जा रहा है कि कोरोना काल में सरकारें और ज्यादा निरंकुश हुई हैं, राज्यों की भूमिका घटाई गयी है, सरकारों ने अपनी मर्जी से वायरस की आड़ में सख्त और एकतरफा फैसले लेने शुरु किए हैं. इस कारण भी गरीबों की संख्या में आगे चलकर और ज्यादा इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है. आईएमएफ की एक रिपोर्ट कहती है कि महामारी फैलने के 14 महीनों बाद अशांति पैदा होती है और दो साल बाद चरम पर पहुंचती है.

सरकार अतिक्रमण कर रही-

इज़रायल के लेखक युवाल नोआ हरारी का कहना है कि सरकारों को महामारी के कारण नागरिकों के घर में घुसने का उनकी जासूसी करने का, उनकी तमाम गोपनीय जानकारी हासिल करने का मौका मिल गया है. कोरोना काल के बाद भी सरकार कह सकती है कि बायोमीट्रिक ब्रेसलेट पहनना अनिवार्य होगा क्योंकि कोरोना लौट कर आ  सकता है, भयावह रुप में सामने आ सकता है, रुप बदल कर सामने आ सकता है. या सरकार कह सकती है चूंकि अफ्रीका में इबोला है या बांग्लादेश में कोई अन्य वायरस है तो एहतियात के लिए ब्रेसलेट पहनना जरुरी है. कुल मिलाकर हमारी निजता पर पहले ही सरकार अतिक्रमण करती रही है और इतना बड़ा मौका मिलने पर वह उसे हाथ से कैसे जाने दे सकती है.

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