योगी बनाएंगे अयोध्या को वैदिक सिटी, बनेगी हिन्दुओं की सबसे पवित्र धर्मनगरी

cm yogi on vaidik city
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नई दिल्ली : अयोध्या को ऐतिहासिक नगरी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खास दिलचस्पी ले रहे हैं. लक्ष्य यही है कि धार्मिक पर्यटन की थीम पर अयोध्या का विकास किया जाए. विशाल राम मंदिर के निर्माण के साथ अयोध्या में पर्यटकों की आवाजाही बहुत बढ़ने की संभावना है. जाहिर है कि विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे. ऐसे में तीर्थनगरी में वर्ल्ड क्लास सुविधाएं विकसित किए जाने पर विशेष ध्यान है.अयोध्या को ‘वैदिक सिटी’ के तौर पर भव्य रूप देकर दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनाने की तैयारी है.

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वैदिक सिटी को लेकर चल रहीं हैं ये तैयारियां-

1,200 एकड़ की इंटीग्रेटेड अयोध्या वैदिक सिटी बनाने के लिए शुरुआत में 1,200 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार हो रहा है. अयोध्या का दायरा बढ़ाकर उसमें 347 नए गांव जोड़े जा रहे हैं जो बस्ती और गोंडा से मिलाए जा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय तौर पर हिंदुओं की सबसे पवित्र धर्मनगरी के रूप में अयोध्या को बसाने की कोशिश होगी और उसी आधार पर वैदिक सिटी या रामायण सिटी की प्लानिंग की जा रही है.

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ये भी प्रयास रहेगा कि अयोध्या पर्यावरण की दृष्टि से भी दुनिया के सामने मिसाल बने और काफी हरा-भरा नजर आए. यहां की बिजली व्यवस्था में सोलर एनर्जी की प्रधानता रहेगी. ग्रीन लैंडस्केप मंदिर के आसपास बड़े इलाके में बनाए जाएंगे जिस पर वैदिक रामायण और वैदिक आर्किटेक्चर होंगे.

 

पुराने मंदिरों का किया जायेगा संरक्षित-

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नगर के पुराने मंदिरों और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को संरक्षित किया जाएगा. ऐसे स्थानों में मणि पर्वत भी शामिल है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां सीता जी का दहेज रखा गया. योग और ध्यान के केंद्र के तौर भी अयोध्या को सबसे अनोखा नगर बनाने की तैयारी है.

जानिए वैदिक शहर के बारे में-

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संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय बीएचयू के वेद विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि वैदिक सिटी नाम दे देने से कोई भी शहर वैदिक सिटी नहीं हो जाएगा. उनके मुताबिक वर्तमान समय में प्रचार के माध्यम के लिए वेद का इस्तेमाल करना उचित नहीं है. प्रो त्रिपाठी का कहना है कि वेदों में वर्णित नगर नियोजन के मुताबिक अगर शहर का निर्माण होता है तो ही उसे वैदिक शहर कहा जा सकता है. प्रो त्रिपाठी के मुताबिक समरांगण सूत्रधार ग्रंथ राजा भोज के समय का एक ग्रंथ है. इसमें स्थापत्य के संबंध में नगर नियोजन की चर्चा वैदिक शहर के रूप में की गई है. इसके मुताबिक कई प्राचीन विकसित भी हुए. जैसे सिंधु घाटी की सभ्यता, नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय में मिले अवशेष वैदिक प्रमाण हैं.

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