कोरोना वायरस के बाद अब इस खतरनाक वायरस ने दी दस्तक…

chapare virus 2020
chapare virus 2020

नई दिल्ली : कोरोना वायरस ने दुनिया को डरा दिया है करोड़ों लोग इस वायरस का शिकार हो चुके हैं हालत ऐसे हैं कि एक साल होने के बावजूद भी इसकी वैक्सीन नहीं बन पायी है. पूरी दुनिया कोरोना वायरस से कराह रही है. लेकिन इसी बीच दुनिया पर एक और वायरस का खतरा मंडराने लगा है. इस वायरस का नाम चैपर बताया जा रहा है, जो चा-पा-रे यानि द चैपर नाम के बोलीवियाई शहर में फैलने लगा है. अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रेवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) यानि सीडीसी ने इसकी पुष्टि भी कर दी है. ये वायरस मानव से मानव में फैलता है. ये इंशान के शरीर में 24 सप्ताह तक रह सकता है.

chapare virus 2020
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इबोला से मिलते-जुलते हैं लक्षण-

ये वायरस इबोला वायरस की तरह ही है,बस थोड़े से बदलाव हैं. इसके लक्षण भी लगभग वही हैं. ये इंसानों से इंसानों में फैलता है, जिसकी वजह से ये कहीं ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये वायरस भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. और कहीं इसका संक्रमण बड़े स्तर पर फैला, तो इसे भी कोरोना वायरस की तरह रोकना नामुमकिन हो जाएगा.

पहले भी आ चुका है ये वायरस-

चैपर वायरस साल 2004 में बोलीविया के चैपर (Bolivian province of Chapare) में मिला था. हालांकि ये कुछ समय में गायब हो गया था. लेकिन पिछले साल फिर से ये सामने आया और पांच लोगों में इसके संक्रमण मिले.साल 2019 में ये वायरस जब दोबारा लौटा तो 3 स्वास्थ्य कर्मियों समेत पांच लोग इससे संक्रमित हुए, जिसमें से दो की मौत हो गई. चैपर वायरस से प्रभावित व्यक्ति के घर के पास एक चूहा भी इस वायरस से ग्रसित मिला था. हालांकि ये साबित नहीं हो पाया कि इस बीमारी का वाहक वो चूहा था.

चैपर वायरस के सामान्य लक्षण-

चैपर वायरस के संक्रमण की स्थिति में वायरस जनित अन्य रोगों की तरह के ही कुछ लक्षण जैसे बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी, खून मिश्रित बलगम, स्किन पर रसेस जैसी दिक्कतें होती हैं. इस साल अभी तक इसका एक भी नया मामला सामने नहीं आया है. ये वायरस जानलेवा है.

चैपर वायरस की पहचान-

पिछले साल इस वायरस को डेंगू, पीले बुखार और अन्य बीमारियों के वायरस से मिलाया गया. लेकिन इसकी पहचान ही नहीं हो पा रही थी. इस वायरस की पहचान अब जाकर पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने की है, जो सीडीसी से जुड़ा है. इस वायरस की पहचान के लिए सीडीसी ने आरटी-पीसीआर टेस्ट विकसित किया है.

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