हुड्डा पर कसा शिकंजा, ईडी ने दर्ज की कम्प्लेंट अब दे रहें जनता की दुहाई

हुड्डा पर कसा शिकंजा
हुड्डा पर कसा शिकंजा

नई दिल्ली: हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री और विधानसभा में नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर कसा शिकंजा अब मुश्किलें लगातार बढ़ जा रही हैं और वह विभिन्‍न मामलों में घिरते जा रहे हैं। प्रवर्तनडी) ने पं निदेशालय (ईचकूला प्‍लाट आवंटन मामले मेंं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित 22 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। ईडी ने पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट अलॉटमेंट स्कैम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के तहत यह चार्जशीट दाखिल की है।

हुड्डा पर कसा शिकंजा

हुड्डा और अन्‍य आरोपितों पर आरोप है कि उन्‍होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और 21 अन्य के खिलाफ पंचकूला भूमि घोटाला मामले में आरोप पत्र दायर किया है.

आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं. ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को बाद में 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी बी आइ) में स्थानांतरित कर दिया गया. सीबीआई ने 120-B, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था.

जांच में पता चला है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के पदेन अध्यक्ष रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने गलत तरीके से भूखंडों का आवंटन किया था। चार सेवानिवृत्त अधिकारी धर्मपाल सिंह नागल (पूर्व मुख्य प्रशासक, हुडा), सुरजीत सिंह (पूर्व प्रशासक, हुडा), सुभाष चंद्र कंसल (हुडा के पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक) और नरेंद्र सिंह सोलंकी (हुडा के फरीदाबाद के पूर्व जोनल प्रशासक) हैं।

ईडी की जांच में पता चला कि भूखंडों को आवंटन के लिए निर्धारित मूल्य को सर्कल दर से 4-5 गुना और बाजार दर से 7-8 गुना कम रखा गया था. एजेंसी ने यह भी कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि के 18 दिन बाद आवंटन के लिए मापदंड बदल दिए गए. ईडी ने आगे कहा कि पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया ‘ कमिटेड एंड कॉम्प्रोमाइज़्ड’ थी।

सच क्या है, जनता जानती है

वहीं पर हुड्डा का बयान आता है जिसमे वो जनता की दुहाई देते कहते हैं की ”तीन कृषि कानूनों पर सरकार लोगों खासकर किसानों का भरोसा खो चुकी है। सरकार के पास अब कोई काम नहीं बचा। विकास कार्य पहले से बाधित थे। अब फिर पहले की तरह सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना से काम करने शुरू कर दिए हैं। सच क्या है, पब्लिक जानती है। मेरे कार्यकाल में कुछ भी गलत नहीं हुआ है। सभी मामलों में नियमों के मुताबिक कार्रवाई हुई है। मैंने किसी लैंड डील में किसी को फायदा नहीं पहुंचाया।

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