विश्व हिन्दी दिवस: जानें कैसे बनाई दुनियाभर में अपनी अलग पहचान

विश्व हिंदी दिवस
विश्व हिंदी दिवस

नई दिल्ली: विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं। भाषा का कोई अपना धर्म ,मजहब नही होता है, ये प्रेम सूचक सन्देश देती है मानव समाज को । भाषा या बोली एक व्यक्ति द्वारा अपनी बात को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने का एक माध्यम है। इस धरती पर मानव सभ्यताओं के फलने-फूलने के साथ ही साथ असंख्य भाषाएँ व बोलियाँ आस्तित्व में आयीं। इनमें से कई भाषाएँ सभ्यताओं के पतन के साथ ही खत्म हो गई लेकिन कई सभ्यताएं और भाषाएँ आज भी खूब फल-फूल रही हैं।

विश्व हिन्दी दिवस
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भारत और विदेश में लगभग 50 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं और इस भाषा को समझने वाले लोगों की कुल संख्या लगभग 90 करोड़ है। हिंदी भाषा का मूल प्राचीन संस्कृत भाषा में है। इस भाषा ने अपना वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों के पश्चात हासिल किया है और बड़ी संख्या में बोलीगत विभिन्नताएं अब भी मौजूद हैं। हिंदी की लिपि देवनागरी है, जो कि कई अन्य भारतीय भाषाओं के लिए संयुक्त है। हिंदी के अधिकतम शब्द संस्कृत से आए हैं। इसकी व्याकरण की भी संस्कृत भाषा के साथ समानता है।भारत के संविधान में देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया है (अनुच्छेद 343 (1))। हिंदी की गिनती भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में सबसे पहले की जाती है।

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हिंदी को गुजरे जमाने की भाषा कहा जाता था लेकिन अब वो समय काफी पीछे छूट गया है जब साहित्यकार हिंदी भाषा की दुर्दशा का रोना रोया करते थे। पिछले करीब एक दशक में हिंदी ने अपने स्तर में उछाल मारते हुए खुद को वैश्विक स्तर की भाषा बना दिया है। आंकडों की मानें तो साल 2016 में ही विश्व आर्थिक मंच ने 10 सर्वाधिक शक्तिशाली भाषाओं की सूची में हिंदी को भी रखा था। यही नहीं संयुक्त राष्ट्र रेडियो अपना प्रसारण हिंदी में करना आरंभ कर चुका है और अगस्त 2018 से संयुक्त राष्ट्र ने साप्ताहिक हिंदी समाचार बुलेटिन का भी आरंभ शुरु किया है।

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विश्व में 25 से भी ज्यादा पत्रिकाएं हिन्दी में प्रकाशित-

आज विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों तथा सैंकडों केंद्रों में विश्वविद्यालय स्तर से शोध स्तर तक हिंदी के अध्ययन व अध्यापन की व्यवस्था हुई है। इतना ही नहीं विदेशों में 25 से अधिक पत्र-पत्रिकाएं लगभग नियमित रूप से हिंदी में प्रकाशित की जा रही हैं। और यही वजह है कि भारत को बाजार के रूप में देखने वाले अन्य देशों के लिए हिंदी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य होता जा रहा है। बात यदि तकनीक व आधुनिक बदलावों की करें तो हर जगह हिंदी ने अपना परचम लहराया है और टेक्नोलॅाजी को भी हिंदीमय होना पडा है। फरवरी 2019 में अबू धाबी में हिंदी को न्यायालय की तीसरी भाषा के रूप में मान्यता मिली है।

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‘हिंदी में रोजगार के साधन सीमित हैं-

जो लोग ये मानते थे कि हिंदी में रोजगार के साधन सीमित हैं अब वो कल की बात हो गई है। हिंदी भाषा की जनसंख्या को देखते हुए कई कॅाल सेंटर से लेकर सरकारी विभागों में हिंदी विभाग तक का गठन किया जाता है। यही वजह है कि ईमेल, ईकॅामर्स, ईबुक, इंटरनेट, एसएमएस व वेब जगत में हिंदी को बडा प्लेटफाॅर्म मिल पाया है। माइक्रोसॅाफ्ट, गूगल, आइबीएम तथा ओरेकल जैसी कंपनियों ने अधिक मुनाफे की लालसा में हिंदी को बढावा देना शुरू कर दिया है। भारत को एक मंडी के रूप में विश्वभर की कंपनियां देख रही हैं। यही वजह है कि उन्हें अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए हिंदीभाषियों की आवश्यकता होती है। यही नहीं कंपनियों को अपना प्रोडक्ट्स मशहूर करने के लिए विज्ञापन तक हिंदी में बनवाने पडते हैं ताकि वो गांवों तक अपनी पकड बना सकें।

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मॅाबाईल एप में भी हिंदी ने बनाई जगह-

एक दशक पहले तक गूगल प्ले स्टोर से कोई भी एप डाउनलोड करने पर भाषा चुनने में हिंदी का विकल्प नहीं आता था। वहीं अब हिंदी अनिवार्य हो गई है। बैकिंग एप, ग्रॅासरी एप, मार्केटिंग एप हो या फेसबुक, ट्विटर और व्हॅाट्सएप हरेक एप में हिंदी ने अपनी जगह बना ली है। गूगल ने भी हिंदी टाइपिंग को लेकर गूगल इंडिक बनाया है ताकि हिंदी टाइपिंग को सुविधाजनक बनाया जा सके।

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गूगल पर बनाई एक अलग पहचान-

हिंदी में पहले तकनीक सिर्फ टाईप राईटर तक ही सीमित थी, उसके प्रति भी युवाओं की दिलचस्पी घटती चली जा रही थी। लेकिन अब कई एप ऐसे भी आ गए हैं जिनमें हिंदी टाइप ही नहीं बल्कि बोलकर भी टाइप किया जा सकता है। ये हिंदी की अनिवार्यता को दर्शाता है कि गूगल ने भी हिंदी को विशिष्ट स्थान दिया है। यही नहीं यूनिकोड व गूगल ट्रांसलेशन ने सीखने वालों का काम भी आसान कर दिया है।

 

 

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