वित्त वर्ष 2021-22 : एक अप्रैल से बदलने वाले हैं यह नियम, जानिए विस्तार से

वित्त वर्ष 2021-22
वित्त वर्ष 2021-22

नई दिल्लीः नया वित्त वर्ष लगने वाला है, जिसको लेकर एक अप्रैल से कई सारे नियमों में बदलाव होने वाले हैं. जिसका सीधा असर आम आदमी, कर्मचारियों व कारोबारियों से लेकर पेंशनधारकों पर पड़ेगा। आयकर की मौजूदा दरें व स्लैब में बिना किसी बदलाव के बावजूद अगले महीने से नए श्रम कानून लागू होने के साथ ही वेतन के ढांचे में बदलाव देखने को मिलेगा। आइये जानते हैं, एक अप्रैल से होने वाले प्रमुख बदलाव के बारे में।

वित्त वर्ष 2021-22
वित्त वर्ष 2021-22

पीएफ योगदान पर टैक्स 

नए वित्त वर्ष 2021-22 में 2.5 लाख रुपये से अधिक के पीएफ योगदान पर आयकर के तहत टैक्स का प्रावधान है। इस दायरे में सामान्य तौर पर प्रति माह दो लाख रुपये से अधिक की कमाई वाले आयकरदाता आएंगे।

ग्रैच्युटी अवधि 

नए श्रम कानून के तहत ग्रैच्युटी की समय-सीमा कम होगी। मालूम हो कि एक कंपनी में लगातार पांच साल तक काम करने पर ग्रैच्युटी का लाभ मिलता है।

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एलटीसी इनकैशमेंट 

अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) वाउचर के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले छूट की अवधि 31 मार्च, 2021 तक की है। यानी अगले महीने से इसका लाभ नहीं लिया जा सकेगा।

बुजुर्गो को आइटीआर भरने से छूट 

75 वर्ष की उम्र से ज्यादे वाले बुजुर्ग पेंशनधारकों को इनकम टैक्स रिटर्न (आइटीआर) दाखिल करने से छूट दी गई है। यह सुविधा केवल उन्हें मिलेगी जिनका आय स्रोत पेंशन व इसपर मिलने वाला ब्याज है।

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ई-इनवॉयस अनिवार्य 

बिजनेस टू बिजनेस (बीटूबी) कारोबार के तहत पहली अप्रैल से ऐसे सभी कारोबारियों के लिए ई-इनवॉयस अनिवार्य हो जाएगा, जिनका टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से अधिक है।

 

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