अगले यूपी विधानसभा को देखते हुए, यह हो सकते हैं सरकार में तीसरे उप-मुख्यमंत्री

यूपी विधानसभा
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यूपीः गुजरात कैडर के 1988 बैच के आइएएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ने प्रशासनिक व सियासी गलियारे में सभी को चौंका दिया है. अचानक अरविंद के सरकारी नौकरी को छोड़ने के पीछे एक सोची-समझी रणनीति बताई जा रही है.

यूपी में विधान परिषद चुनाव की घोषणा होते ही अरविंद शर्मा द्वारा वीआरएस लेना अनायास नहीं है. पार्टी के अंदर के लोग अरविंद को यूपी में विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जता रहे हैं. गुजरात से छपने वाले एक दैनिक अखबार ने अरविंद शर्मा को योगी सरकार में उपमुख्यमंत्री का दावेदार बनाए जाने संबंधी खबर प्रकाशि‍त की है जिसके बाद से प्रदेश में भाजपा का अंदरूनी राजनीतिक तामपान बढ़ गया है. हालांकि भाजपा से जुड़े वरिष्ठ पदाधि‍कारी किसी जातीय गणि‍त के लिहाज से किसी दलित‍ नेता को योगी सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद देने की वकालत कर रहे हैं.

मऊ जिले के हैं-

मऊ जिले की मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के रानीपुर विकास खंड अंतर्गत काझाखुर्द गांव के रहने वाले शिवमूर्ति राय व शांति देवी के बड़े बेटे अरविंद कुमार शर्मा का जन्म वर्ष 1962 में 11 अप्रैल को हुआ था. अरविंद शर्मा के पिता रोडवेज में ट्रैफि‍क इंस्पेक्टर और माता गृहणी थीं. तीन भाईयों में सबसे बड़े अरविंद बचपन से ही मेधावी थे. शुरुआती शि‍क्षा गांव के ही प्राइमरी विद्यालय से लेने के बाद उन्होंने डीएवी इंटर कालेज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने स्नातक के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय का रूख किया. यहां से राजनीति शास्त्र में परास्नातक पाठ्यक्रम में टॉप किया.

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर-

इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि‍ भी ली. इसके बाद वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीतिक शास्त्र विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नौकरी शुरू की. सिविल सेवा में जाने का सपना देखने वाले अरविंद ने अध्यापन के साथ अध्ययन पर भी खूब मेहनत की. तीसरे प्रयास में वर्ष 1988 में अरविंद का चयन गुजरात कॉडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हो गया. एसडीएम पद पर उनकी पहली तैनाती 1989 में हुई. वह वर्ष 1995 में मेहसाणा के कमिश्नर बने.

मेहनत और कर्मठता से बनाई पहचान-

अरविंद ने मेहनत और कर्मठता से अपनी अलग पहचान बनाई. वर्ष 2001 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली तो जिन ईमानदार नेताओं को अपने कार्यालय में तैनात किया उनमें अरविंद शर्मा मुख्य थे. अरिवंद को सचिव मुख्यमंत्री का पद मिला और वर्ष 2013 में उनको पदोन्नत कर मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी दी गई. नरेंद्र मोदी जब वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बने तो अरविंद को भी अपने साथ प्रधानमंत्री कार्यालय लाना नहीं भूले. जून 2014 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव बना दिया गया. वर्तमान में अरविंद शर्मा लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्रालय में सचिव पद पर तैनात थे. शर्मा ने 11 जनवरी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है.

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उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है-

इसके बाद से गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश तक का राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. माना जा रहा है कि अरविंद शर्मा की दूसरी पारी राजनीतिक क्षेत्र में शुरू हो सकती है. अरविंद को उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है. मऊ में अरविंद शर्मा के परिवार वाले इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन उनके गांव काझाखुर्द के पूर्व प्रधानाध्यापक राम सनेही राय कहते हैं, “हम सबको अरविंद की प्रतिभा पर पूरा भरोसा है. वीआरएस लेने से पहले उन्होंने निश्चित तौर पर कुछ ऐसा सोचा होगा जिससे फिर से उनके मित्रों व गांव को गौरवान्वित होने का मौका मिलेगा.”

विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार कर कुछ नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है जिनमें अरविंद शर्मा प्रमुख हैं. हालांकि, अरिवंद के यूपी की राजनीति में उतरने की बाबत कुछ भी कहने से भाजपा के प्रदेश पदाधि‍कारी बच रहे हैं.

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