इन 7 शब्दों को समझे बिना नही जान सकते बजट 2021, कौन से हैं यह शब्द

वित्त मंत्री
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नई दिल्ली:  बजट 2021, अक्सर कुछ लोग कहते है कि हमें बजट समझ में नही आती। बजट के पेचीदा शब्‍द इसको और भारी भरकम बनाते हैं। इसलिए बजट को समझने के लिए इसकी शब्‍दावली को समझने की जरूरत है। आइए जानें बजट से जुडें वो अनोंखे शब्द जो अक्सर आप सुनते हैं, लेकिन समझ नहीं पाते।

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1. बजट 2021: कर (tax)

कर (tax) सरकार खर्चों को पूरा करने के लिए आमदनी टैक्स से करती है। यह एक प्रकार से अनिवार्य भुगतान है जिसे हर आदमी सरकार को देता है। यह टैक्स दो प्रकार होते हैं, प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर। वह टैक्स, जो आपसे सीधे तौर पर वसूला जाता है। जैसे- इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, शेयर या दूसरी संपतियों से आय पर कर डायरेक्ट टैक्स या प्रत्यक्ष कर कहलाते हैं।

दूसरी तरफ, वह टैक्स जिसे सीधे जनता से नहीं लिया जाता लेकिन जिसका बोझ आखि‍रकार उसी पर पड़ता है, उसे अप्रत्यक्ष कर कहते हैं। जैसे, देश में तैयार की गई वस्तुओं पर लगने वाला उत्पाद शुल्क, आयात या निर्यात किए जाने वाले वस्तुओं पर लगने वाले सीमा शुल्क, सर्विस टैक्स आदि अप्रत्यक्ष कर हैं।

2. उपकर और अधि‍भार (cess and surcharge)

सेस या उपकर किसी टैक्स के साथ किसी विशेष उद्देश्य के लिए धन इकठ्ठा करने के लिए, कर आधार पर ही लगाया जाता है। जैसेः स्वच्छ भारत सेस, कृषि कल्याण सेस, स्वच्छ पर्यावरण सेस आदि। अधिभार या सरचार्ज कर के ऊपर लगने वाला कर है जिसकी गणना कर दायित्व के आधार पर की जाती है। अधिंकास इसे इनकम टैक्स के ऊपर लगाया जाता है।

बजट 2021
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3. आयकर (Income tax)

यह हमारी आय के स्रोत जैसे कि आमदनी, निवेश और उस पर मिलने वाले ब्याज पर लगता है।

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4. कॉरपोरेट टैक्स (Corporate tax)

कॉरपोरेट टैक्स कॉरपोरेट कंपनियों या फर्मों पर लगाया जाता है, जिसके जरिए सरकार को आमदनी होती है।

5. उत्पाद शुल्क (Excise duties)

देश की सीमा के भीतर बनने वाले सभी उत्पादों पर लगने वाला टैक्‍स को उत्पाद शुल्क  कहते हैं। हालांकि एक्‍साइज़ ड्यूटी को अब जीएसटी में शामिल कर लिया गया है।

बजट 2021
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6. सीमा शुल्क (Customs duties)

सीमा शुल्क उन वस्तुओं पर लगता है, जो देश में आयात की जाती है या फिर देश के बाहर निर्यात की जाती है।

7. वित्तीय वर्ष (financial year)

भारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत एक अप्रैल से होती है और यह अगले साल के 31 मार्च तक चलता है। यह किसी साल के एक अप्रैल से 31 मार्च तक के लिए होता है। भारत में भी मांग उठ रही है कि वित्तीय वर्ष को जनवरी से दिसंबर तक किया जाए। जैसा कि कई देशों में है, लेकिन अभी इसे माना नहीं गया है

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