बजट सत्र की शुरुआत, विपक्षियों ने किया विरोध किसानों के समर्थन में की नारेबाजी

बजट सत्र
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नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण के साथ शुक्रवार को बजट सत्र की शुरुआत हो गई। इसके साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी। बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस बार का बजट देश के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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बजट सत्र कई संकटों का जिक्र

राष्ट्रपति ने सबसे पहले पिछले साल आई कोरोना, सीमा पर तनाव समेत कई संकटों का जिक्र किया। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने कहा कि इतने संकटों के बावजूद देश मजबूती से खड़ा रहा, राष्ट्रपति ने कहा कि चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो, न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा। राष्ट्रपति ने पिछले साल पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और कोरोना से छह सासदों समेत देश में अनेकों लोगों के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इसके साथ ही राष्ट्रपति ने कोरोना के दौरान सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सरकार संकट के समय में देश की आम जनता के साथ खड़ी रही,  इसके साथ ही उन्होंन आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को आगे ले जाने का आवाहन भी किया।

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आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

उन्होंने कहा, ‘ऐसे अनेक निर्णय हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में लिए गए हैं। मेरी सरकार ने दिखाया है कि नीयत साफ हो, इरादे बुलंद हों तो बदलाव लाया जा सकता है। इन वर्षों में मेरी सरकार ने जितने लोगों के जीवन को छुआ है, वह अभूतपूर्व है। साथ ही उन्होंने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में सरकार के उल्लेखनीय गतिविधियो का जिक्र किया। अपने अभिभाषण के अंत में राष्ट्रपति ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘हम सब मिलकर आगे बढ़ें, सभी देशवासी मिलकर।

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कृषि कानूनों का मामला

राष्ट्रपति ने तीनों कृषि कानूनों का मामला भी उठाया। राष्ट्रपति ने कहा, ‘कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए मेरी सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत की गई है।’ राष्ट्रपति ने कहा, ‘मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है। बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं।’

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