जानें ‘प्रबुद्ध भारत’ का इतिहास, जिसकी 125 वीं वर्षगांठ पर Modi कर रहे हैं संबोधित

प्रबुद्ध भारत'
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नई दिल्ली : प्रबुद्ध भारत’ की 125 वीं वर्षगांठ समारोह का आयोजन उत्तराखंड़ में आयेजित किया जा रहा है। रामकृष्ण आदेश की मासिक पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ स्वामी विवेकानंद द्वारा शुरू की गई जिसकी 125 वीं वर्षगांठ समारोह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, दर्शन, इतिहास, मनोविज्ञान, कला और अन्य सामाजिक मुद्दों पर कई महान हस्तियों ने अपने लेखन के माध्यम से ‘‘प्रबुद्ध भारत’’ के पन्नों पर अपनी छाप छोड़ी है।

प्रबुद्ध भारत'
प्रबुद्ध भारत’

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राजनीतिक या क्षेत्रीय इकाई से परे

पीएम मोदी ने प्रबुद्ध पत्रिका की 125वीं वर्षगांठ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने हमारे राष्ट्र की भावना को प्रकट करने के लिए इस पत्रिका का नाम प्रबुद्ध भारत रखा। वह जागृत भारत बनाना चाहता था। जो लोग भारत को समझते हैं, वे जानते हैं कि यह सिर्फ राजनीतिक या क्षेत्रीय इकाई से परे है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत को एक ऐसी सांस्कृतिक चेतना के रूप में देखा, जो सदियों से चली आ रही है और सांस ले रही है, एक ऐसा भारत जो विपरीत भविष्यवाणियों के बावजूद हर चुनौती के बाद मजबूत होता है। वह भारत को ‘प्रबुद्ध’ बनाना चाहते थे या जागृत करना चाहते थे।

प्रबुद्ध पत्रिका
प्रबुद्ध पत्रिका

NCC ने अपनी जो छवि बनाई है वो दिनों दिन और मज़बूत होती जा रही है -पीएम मोदी

बता दें कि प्रबुद्ध भारत पत्रिका अमेरिका, आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, कीनिया, मॉरिसस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, रूस, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, स्वीडन, इंग्लैंड, स्पेन, स्वीटजरलैंड, नेपाल देशों में पढ़ी जा रही है। ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका भारत के प्राचीन आध्यामिक ज्ञान के संदेश को प्रसारित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। इसका प्रकाशन चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से शुरू किया गया था जहां से दो साल तक इसका प्रकाशन होता रहा। पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ का प्रकाशन चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से साल 1896 में शुरू हुआ, जहां दो सालों तक इसका प्रकाशन जारी रहा जिसके बाद यह अल्मोड़ा से प्रकाशित हुआ। बाद में अप्रैल 1899 में पत्रिका के प्रकाशन का स्थान उत्तराखंड में मायावटी स्थित अद्वैत आश्रम में स्थानांतरित कर दिया गया था और तब से यह लगातार प्रकाशित हो रहा है। यह पत्रिका भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान के संदेश को फैलाने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

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