निकिता हत्याकांड में मिली उम्रकैद, परिजन मांग कर रहे फांसी

निकिता हत्याकांड
निकिता हत्याकांड

नई दिल्ली: निकिता हत्याकांड: दिल्ली से सटे बल्लभगढ़ में 26 अक्टूबर 2020 को अग्रवाल कालेज(Aggarwal College) के बाहर गोली मारकर छात्रा निकिता की हत्या(Nikita Murder Case) के दोषियों तौशीफ और रेहान को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उन पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बासवाना की अदालत ने अगवा करने की कोशिश के लिए दोनों को पांच साल जेल और दो-दो हजार रुपये जुर्माना, साजिश रचने की धारा के तहत दोनों को पांच साल जेल व दो-दो हजार रुपये जुर्माना और शस्त्र अधिनियम के तहत तौशीफ को चार साल जेल और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा की। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

निकिता हत्याकांड: लव जिहाद का मामला

सेक्टर-56 अपना घर सोसायटी निवासी निकिता बीकाॅम आनर्स तृतीय वर्ष की छात्रा थीं। अदालत में पेश मुकदमे के अनुसार सोहना निवासी तौशीफ निकिता से एकतरफा प्यार करता था, उस पर शादी के लिए दबाव बना रहा था। शादी से इन्कार करने पर उसने साथी रेहान के साथ मिलकर निकिता की हत्या की। बुधवार को अदालत ने तौशीफ और रेहान को निकिता की हत्या का दोषी ठहराया था। निकिता की हत्या को लव जिहाद से जोड़कर देखा गया था और देशभर में इस घटना पर उबाल देखा गया था।

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अभी न्याय अधूरा है

इस घटना के बाद यूपी सरकार ने लव जिहाद के लिए कानून बनाया, वहीं प्रदेश सरकार ने भी कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ठीक पांच माह बाद 26 मार्च को यह फैसला सुनाया। हमारे लिए अभी न्याय अधूरा है। हमारी हंसती खेलती जिदगी में दोषियों ने जहर घोल दिया। हमारी कोशिश दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की है। अब हम हाई कोर्ट में अपील करेंगे और दोषियों को फांसी कराकर ही दम लेंगे।

निकिता हत्याकांड
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पिता- अधिक सजा की मांग करेंगे

मूलचंद तोमर, निकिता के पिता ने कहा अदालत के फैसले का हम सम्मान करते हैं। अदालत ने कम समय में फैसला दिया है। हम फैसले का अध्ययन कर रहे हैं। हाई कोर्ट में अपील कर हम दोषियों को अधिक सजा की मांग करेंगे।

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अनीस खान, तौशीफ के वकील ने कहा की एदल सिंह रावत, निकिता पक्ष के वकील आरोप पक्ष के पास केवल एक चश्मदीद गवाह था, उसने भी अदालत में तौशीफ की पहचान नहीं की। हमने अदालत से अपील की थी कि इस मुकदमे को दुर्लभतम की श्रेणी में ना रखा जाए। अदालत ने हमारी अपील स्वीकार की। फैसले का अध्ययन कर हम सजा कम करने के लिए हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

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