सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानून के समर्थन में याचिका दायर, फ्लोर मिलों ने लगायी गुहार

कृषि कानून के समर्थन में याचिका
कृषि कानून के समर्थन में याचिका

 नई दिल्ली। कृषि कानून के समर्थन, सुप्रीम कोर्ट में जहां एक ओर नए कृषि कानूनों के खिलाफ कई याचिकाएं लंबित हैं वहीं कोर्ट ने कई कानूनों को रद्द करने की मांग की गई है, अब कानूनों का समर्थन करने वाला वर्ग भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये हैं। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की दो मैदा मिलों ने कृषि कानूनों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया जाए कि वे इन कानूनों को लागू करें।

कृषि कानून के समर्थन में याचिका
कृषि कानून के समर्थन में याचिका

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कृषि कानून के समर्थन: जीवन के अधिकार-

यह याचिका रामवे फूड्स लिमिटेड और आरसीएस रोलर फ्लोर मिल्स लिमिटेड ने वकील डीके गर्ग के जरिये दाखिल की है। मैदा मिलों ने इसमें रोजगार की आजादी और जीवन के अधिकार की दुहाई है। याचिका में कहा गया है कि देश में करीब 2,000 रोलर फ्लोर मिल्स हैं जो बड़े पैमाने पर आटा, मैदा, सूजी और ब्रान का उत्पादन करती हैं। ये मिलें गेहूं की बड़ी उपभोक्ता हैं जिसे वे कच्चे माल के तौर पर खरीदती हैं।

 मुश्किलों और शिकायतों पर विचार-

फ्लोर मिलों का कहना है कि वे कृषि उपज के बड़े स्टेक होल्डर है इसलिए कोर्ट द्वारा गठित कमेटी में उनके प्रतिनिधि भी होने चाहिए ताकि कानूनों का समर्थन करने वाले उन लोगों की मुश्किलों और शिकायतों पर भी विचार हो।
कृषि कानून के समर्थन में याचिका
कृषि कानून के समर्थन में याचिका
याचिका में कहा गया है कि चारा उत्पादन इंडस्ट्री, दूध डेयरी आदि भी इन मिलों के प्रोसेस्ड उत्पादों जैसे भूसी आदि का उपयोग करती हैं। ऐसे में यह उनके लिए यह भी जरूरी है। रोलर फ्लोर मिल्स खुले बाजार और मंडी से थोक में गेहूं खरीदती हैं। ये मिलें माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस की श्रेणी में आती हैं और ये सीधे व परोक्ष रूप से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती हैं।

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