कश्मीर G-23 सम्मेलन में भगवा पगड़ी में नज़र आये कांग्रेस के असंतुष्ट नेता

कश्मीर G-23 सम्मेलन
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नई दिल्ली : कश्मीर G-23 सम्मेलन: एक ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावी राज्य तमिलनाडु का दौरा कर रहे हैं, वहीं जम्मू में कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं का समूह जी-23 के नेता समारोह में शामिल हुए हैं। यहांं पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कांग्रेस के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस उन्हें कमजोर होती दिख रही है। उन्होंने गुलाम नबी आजाद को दोबारा राज्यसभा के लिए नामित न किए जाने पर भी सवाल उठाए।

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पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस के कई नेता जम्मू के शांति सम्मेलन में पहुंच हैं जिसे गांधी ग्लोबल फैमिली नामक एक एनजीओ ने आयोजित किया है। इस दौरान कांग्रेस के सभी नेता भगवा साफे में नजर आए।

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सच बोलने का मौका है, सच बोलेंगे

कपिल सिब्बल ने कहा, ‘सच बोलने का मौका है और आज सच ही बोलेंगे। हम क्यों यहां इकट्ठा हुए हैं। सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस पार्टी हमें कमजोर होती दिख रही है। इसलिए हम यहां इकट्ठा हुए हैं। पहले भी इकट्ठा हुए थे। हमें इकट्ठा होकर इसे मजबूत करना है। हम नहीं चाहते थे कि गुलाम नबी आजाद साहब को संसद से आजादी मिले।’

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अनुभव का इस्तेमाल क्यों नहीं कर पा रही

सिब्बल ने आगे कहा, ‘पूछिए क्यों? क्यों मैं समझता हूं कि जबसे वह राजनीति में आए कोई ऐसा मंत्रालय नहीं रहा, जिसमें वह मंत्री नहीं रहे। कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसको वह जानते नहीं हैं। टेलिफोन पर जब किसी भी नेता को फोन करते थे, तो उनके यहां आकर बैठक करते थे। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस अनुभव को कांग्रेस पार्टी इस्तेमाल क्यों नहीं कर पा रही है।’

हमें कोई न बताए कि हम कांग्रेसी हैं या नहीं- आनंद शर्मा

पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने अपने संबोधन में कहा, ‘हममें से कोई ऊपर से नहीं आया। खिड़की रोशनदान से नहीं आया। दरवाजे से आए हैं। चलकर आए हैं। छात्र आंदोलन से आए हैं। युवक आंदोलन से आए हैं। यह अधिकार मैंने किसी को नहीं दिया कि मेरे जीवन में कोई बताए कि हम कांग्रेसी हैं कि नहीं हैं। यह हक किसी का नहीं है। हम बता सकते हैं कांग्रेस क्या है। हम बनाएंगे कांग्रेस को।’

 

कश्मीर G-23 सम्मेलन
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आनंद शर्मा ने आगे कहा, ‘पिछले 10 सालों में कांग्रेस कमजोर हुई है। दो भाई अलग-अलग मत रखते हों, तो इसका मतलब यह नहीं है कि घर टूट जाएगा। या भाई, भाई का दुश्मन हो जाता है, ऐसा तो नहीं हो जाता है। अगर कोई अपना मत न व्यक्त करे कि उसका कोई क्या मतलब न निकाल ले, फिर वह घर मजबूत नहीं रहता है।’

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‘जम्मू- कश्मीर के मुद्दे पर इन सभी ने बोला’

इससे पहले गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘पिछले 5-6 साल से इन सभी दोस्तों ने जम्मू-कश्मीर को लेकर, यहां की बेरोजगारी, राज्य का दर्जा छीनने, इंडस्ट्री को खत्म करने, शिक्षा और जीएसटी लागू करने के मुद्दे लेकर संसद में मुझसे कम नहीं बोला है। चाहे जम्मू हो या कश्मीर या लद्दाख, हम सभी धर्म, लोगों और जाति का सम्मान करते हैं। हर एक समान रूप से सभी का आदर करते हैं। यह हमारी ताकत है और इसे हम आगे भी जारी रखेंगे।’

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