एयर इंडिया का घाटा बढ़कर पहुंचा 10 हजार करोड़ के पार, सरकार लगी बेचने में

एयर इंडीया
एयर इंडीया

नई दिल्ली: भारत सरकार एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने में अभी तक कामयाब नही हो पाई है। टाटा ग्रुप सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर इसकी हिस्सेदारी में बोली लगा सकती है। मुश्किल में फंसी एयर इंडिया का घाटा बढता ही जा रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में एयर इंडिया का घाटा लगभग बढ़ कर 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

एयर इंडिया-

घाटे में और तेजी होती आ रही है। कोरोना संक्रमण की वजह से दुनिया में एयर लाइंस कंपनियों को घाटा झेलना पड़ रहा है। जिसके चलते एयर इंडिया का घाटा और अधिक बढ़ गया है। सरकार की ओर से इसे बेचने की कोशिश की जा रही है। एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2019-20 में भी 8000 करोड़ रुपये का घाटा पहले ही हो चुका है। वित्त वर्ष 2018-19 में एयर लाइंस को 8500 करोड़ का कम घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2017-18 में एयर इंडिया का घाटा 5300 करोड़ रुपये था।

एयर इंडिया
एयर इंडिया

 बढ़ता जा रहा है एयर इंडिया का घाटा-

एयर इंडिया का घाटा तेजी से बढता जा रहा है। एयरलाइंस को 8000 करोड़ रुपये का कैश घाटा पिछले वर्ष में हुआ है। ओर शेष घाटा डेप्रिसएशन लागत से अलग हुआ है। इस वजह से एयरलाइंस की वैल्यूएशन और कम होती जा रही है। इससे बेचते समय सरकार को और कम रकम मिलेगी।

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पांच हजार करोड़ का फंड-

एयरलाइंस कई साल से अपने घाटे को पूरा करने के लिए कर्ज ले रही है जिस के कारणा आब एयरलाइंस नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड NSSF से 5 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले रही है। और बाकी तीन बैंकों से एयर इंडिया 10 हजार करोड़ रुपये जुटाएगी। जिसमें एनएसएसएफ से चार हजार करोड़ रुपये लेगी। जिसमें 1 हजार करोड़ रुपये जल्द मिलेंगें। एयर इंडिया की हिस्सेदारी सरकार बेचने की कोशिश कर रही है । जिसमें टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस दोनों मिल कर इसे खरिदने जा रही है।

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